अलाउद्दीन खिलजी (वास्तविक नाम गुलीगुर्शप 1296-1316) दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश का दूसरा शासक था। उसका साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर उत्तर-मध्य भारत तक फैला था। इसके बाद इतना बड़ा भारतीय साम्राज्य अगले तीन सौ सालों तक कोई भी शासक स्थापित नहीं कर पाया था।
मेवाड़ चित्तौड़ का युद्धक अभियान इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है। ऐसा माना जाता है कि उसने चित्तौड़ पर आक्रमण किया था क्योंकि चित्तौड़ राजनीतिक और भौगोलिक तौर पर महत्वपूर्ण स्थान रखता था इस घटनाक्रम के साथ पद्मिनी नामक रानी का मिथक अनायास ही मिलता है हालांकि इसका वर्णन मलिक मुहम्मद जायसी की एक किताब पद्मावत के अलावा कई नहीं मिलता है।
🏛️ रामप्पा मंदिर
बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर (तंजोर) में स्थित एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण राजा चोल (I) द्वारा 1010 ईस्वी में करवाया गया था। बृहदेश्वर भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख मंदिर है जिसमें उनकी नृत्य की मुद्रा में मूर्ति स्थित है जिसको नटराज कहा जाता है। मंदिर को राजेश्वर मंदिर, राजराजेश्वरम और पेरिया कोविल के नाम से भी जाना जाता है। एक हजार साल पुराना यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूचि में शामिल है, और अपने असाधारण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों की वजह से काफी प्रसिद्ध है। बृहदेश्वर मंदिर एक शानदार वास्तुशिल्प निर्माण है, जो भी इस मंदिर को देखने के लिए जाता है वो इसकी संरचना को देखकर हैरान रह जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर को बनने के लिए 130,000 टन से अधिक ग्रेनाइट का उपयोग किया गया था। यह मंदिर दक्षिण भारतीय राजाओं की स्थापत्य कौशल और आत्मीयता को दर्शाता है।
🏛️ महाबलीपुरम के रथ मंदिर, तटीय मंदिर
यह एक संरचनात्मक मंदिर है, जिसे 8वीं शताब्दी ईस्वी से लेकर ग्रेनाइट के ब्लॉकों से बनाया गया है। इसके निर्माण के समय, पल्लव वंश के नरसिंहवर्मन द्वितीय के शासनकाल के दौरान यह स्थल एक व्यस्त बंदरगाह था । महाबलीपुरम में स्मारकों के समूह में से एक के रूप में , इसे 1984 से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में वर्गीकृत किया गया है । यह दक्षिण भारत के सबसे पुराने संरचनात्मक (बनाम रॉक-कट ) पत्थर के मंदिरों में से एक है ।
दिलवाड़ा मंदिर या देलवाडा मंदिर, पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित हैं। इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं। दिलवाड़ा के मंदिरों में 'विमल वासाही मंदिर' प्रथम र्तीथकर को समर्पित सर्वाधिक प्राचीन है जो 1031 ई. में बना था। बाईसवें र्तीथकर नेमीनाथ को समर्पित 'लुन वासाही मंदिर' भी काफी लोकप्रिय है। यह मंदिर 1231 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों द्वारा बनवाया गया था। दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पांच मंदिर संगमरमर का है। मंदिरों के लगभग 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियां बनी हुई हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियां मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं
🏛️ हजारा राम मंदिर
हज़ार राम मन्दिर अथवा 'हज़ारा राम मन्दिर' हम्पी, कर्नाटक के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक है। हम्पी में बहुत-से ऐसे आकर्षण हैं, जो पर्यटकों को लुभातें हैं। अपने गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हम्पी के कई पर्यटन स्थल विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल हैं। राजा कृष्णदेव राय को इस मन्दिर का निर्माता कहा जाता है।
शाही परिधि के मध्य स्थित 'हज़ार राम मन्दिर' हम्पी के मुख्य आकर्षणों में से एक है।ह भगवान विष्णु को समर्पित हम्पी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय मन्दिरों में से एक है।
हज़ार राम मन्दिर' हम्पी के राजा का निजी मन्दिर माना जाता है।इस स्थान का इस्तेमाल केवल समारोहों के लिए किया जाता था और श्रद्धालुओं के बीच यह अपनी निम्न उद्भूत नक्काशीदार मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है, जो रामायण में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
मन्दिर की भीतरी और बाहरी दीवारों पर बेहतरीन नक़्क़ाशी की गई है।बाहरी कमरों की छतों के ठीक नीचे बनी नक़्क़ाशी में हाथी, घोड़ा, नृत्य करती बालाओं और मार्च करती सेना की टुकड़ियों को दर्शाया गया है, जबकि भीतरी हिस्से में 'रामायण' और हिन्दू देवताओं के दृश्य दिखाए गए हैं। इसमें असंख्य पंखों वाले गरुड़ को भी चित्रित किया गया है।मन्दिर में चार नक़्क़ाशीदार ग्रेनाइट के स्तंभ अर्द्ध मंड़प की खूबसूरती को बढ़ाते हैं।'
हज़ार राम मन्दिर' के दर्शन करने आए पर्यटक भूतपूर्व राजाओं के शासन के दौरान अस्तित्व में रहे स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत की खोज कर सकते हैं।मन्दिर की बाहरी दीवारों पर की गई नक़्क़ाशियाँ इसकी एक ख़ास बात है। यहाँ भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा स्थापित है, जो भगवान विष्णु के नौवें अवतार थे।
'जनानख़ाना' और 'कमल महल' हज़ार राम मन्दिर के निकट स्थित अन्य आकर्षण स्थल हैं।
🏛️ विरुपक्श मंदिर
विरुपाक्ष मंदिर भारत के कर्नाटक राज्य के बल्लारी जिले में हम्पी में स्थित है । यह हम्पी में स्मारकों के समूह का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया है । यह मंदिर शिव के एक रूप भगवान विरुपाक्ष को समर्पित है । मंदिर का निर्माण लक्कन दंडेश द्वारा किया गया था, जो शासक देव राय द्वितीय के अधीन एक नायक (सरदार) था, जिसे विजयनगर साम्राज्य के प्रौदा देव राय के नाम से भी जाना जाता था ।
विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी तुंगभद्रा नदी (पम्पा होल/पम्पा नदी) के तट पर स्थित है । विरुपाक्ष मंदिर हम्पी में तीर्थयात्रा का मुख्य केंद्र है, और सदियों से इसे सबसे पवित्र अभयारण्य माना जाता रहा है। यह आसपास के खंडहरों के बीच बरकरार है और अभी भी पूजा में उपयोग किया जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है , जिन्हें यहां विरुपाक्ष/पम्पा पथी के नाम से जाना जाता है, जो तुंगभद्रा नदी से जुड़ी स्थानीय देवी पंपदेवी की पत्नी हैं। तिरुपति से लगभग 100 किमी दूर, आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के नलगमपल्ले नामक गाँव में एक विरुपक्षिणी अम्मा मंदिर (देवी माँ) भी है ।
मोढेरा सूर्य मंदिर गुजरात के मेहसाना जिले के “मोढेरा” नामक गाँव में पुष्पावती नदी के किनारे प्रतीष्ठित है। यह स्थान पाटन से 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह सूर्य मन्दिर भारतवर्ष में विलक्षण स्थापत्य एवम् शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है। सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम द्वारा सन् 1125-1127 ई॰ में इस मन्दिर का निर्माण किया गया था। वर्तमान समय में यह भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और इस मन्दिर में पूजा करना निषिद्ध है।
इस मन्दिर परिसर के मुख्य तीन भाग हैं- गूढ़मण्डप (मुख्य मन्दिर), सभामण्डप तथा कुण्ड (जलाशय)। इसके मण्डपों के बाहरी भाग तथा स्तम्भों पर अत्यन्त सूक्ष्म नक्काशी की गयी है। कुण्ड में सबसे नीचे तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हैं तथा कुछ छोटे-छोटे मन्दिर भी हैं।










